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डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'

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डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'

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परिवार की कथा

परिवार की कथा

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छोटा सा परिवार था प्यारा

चार सदस्यों से उजियारा,

आकर बसा गांव से शहर

बीते सुख में चार पहर।


बूढ़े बाबा रह गए गांव

बैठे रहते नीम की छांव,

धीरे-धीरे बीता काल

बीमारी से हुए बेहाल।


लाना पड़ा उन्हें शहर

देखभाल की शामो-सहर,

बेटा करता सेवा नित

प्यारा पोता हुआ प्रमुदित।


पत्नी ने फिर किया बवाल

रोज करे वह ढेर सवाल,

दूर करो इस कृशकाया को

मुझे नहीं रहना ससुराल।


बार-बार समझाने पर भी

घर में रहने लगा कलेश,

हाथ पकड़ अपने बाबा का

वृद्धाश्रम में किया प्रवेश।


पीछे-पीछे रोते-रोते

बहू और पोता पहुंचे,

लौट आइये अपने घर में

हम हैं आपके बच्चे।


सुबह का भूला शाम को वापस

गर जल्दी ही आ जाए,

उस कुटुम्ब के बंधन को तो

अरे कोई ना तोड़ पाए।


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