STORYMIRROR

Pradeep Sahare

Others

3  

Pradeep Sahare

Others

प्रेम

प्रेम

1 min
164


नयनो से उतरकर,

सांसो को रोककर

हृदय स्पंदन बढाकर

दिल में उतरकर

शब्द बनकर

कागज़ पर उतरकर

गुलाब के फुल में,

समाहित होकर

पंखुड़ियों में बिखरकर

लगता अपना हरदम

वह शब्द है,

प्रेम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Pradeep Sahare