STORYMIRROR

नीलम पारीक

Others

3  

नीलम पारीक

Others

प्रेम रात का

प्रेम रात का

1 min
542

प्रेम रात

का चाँद से

कब से जाने

तब से शायद

जब से चमके

नील गगन में


तारों के संग

उजला चाँद

अमृत सा

बरसाता चाँद

जाने कैसी

प्यास प्रेम की

बढ़ती जाती

नित्य निरन्तर


न ये बुझी है

नहीं बुझेगी

प्रेम क्षुधा है

अगन नहीं है


चाँद के संग

खेले अठखेली

हर दिन है

इनका मधुमास

चाँद पिया का प्रेम

हो ज्यूँ यूँ

अंजुरी भर-भर

पिये उजास...



Rate this content
Log in