पराये से अपने
पराये से अपने
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कहने को तो अपने, ये पराये से लगते हैं ,
दिल फैसला कर नहीं पाता सब सपने से लगते हैं
भारी दुःख जब सताता तब अपनों की याद आती है,
कोई गले लगाता पीठ थपथपाता पलकों पर बूंदें आती हैं
मेरा समय जब अच्छा था, मै चारो तरफ दिखती थी,
उनके आगे पीछे में मै बच्चों को भी छोड़ दिया करती थी
आज मेरे साथ मेरे बच्चे और जीवन साथी हैं,
सभी परायों की पचान हो चुकी है।
