STORYMIRROR

Love Kumar

Others

4  

Love Kumar

Others

फुनगियों पर चांद

फुनगियों पर चांद

1 min
400

आसमान का इतना भार

कैसे सहा होगा

इन नन्हे पत्तों की फुनगि्यों ने

जो अभी अभी अवतरित हुई हैं

भवसागर को पार कर


सुबह ही नहा लेती हैं

किसी पवित्र संत की तरह

ओस की बूंदों में

मानो मुक्त के पट खुलते हैं

इन पर दर्ज इन्द्रधनुष से

जो ले चलते हैं

प्रकाशपुंज में बिठाकर

मोक्ष द्वार तक


इनके समक्ष झुकते हैं मेघ भी

किसी आज्ञाकारी शिष्य की तरह

तारों को भी देखा है

इनके इर्द गिर्द टिमटिमाते

मानो प्रकृति ने

भर दिया हो उजाला

दो अन्धेरे ग्रह चमक उठते हैं

ललाट की मानिंद


चन्द्र कलाएं

इनकी नोकों पर सवार

पूरे करती हैं अपने चक्र

चांद भी पूर्णिमा के दिन

चमकता है

किसी संत का ओरा बन

इनके अक्स से लिपटा

तब नजर आता है

दूधिया आकाश पर

स्वर्ग का रास्ता

नन्हीं नन्हीं फुनगि्यों पर

चांद ही तो मोक्ष द्वार है ।



Rate this content
Log in