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Love Kumar

Others

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कर्तव्य

कर्तव्य

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सबसे पहले नमन है मेरा

उस धरती को

जिस पर बिसर रहा दिन जीवन,

उन बूंदों को भी नमन है

जो रुकी रही रात भर

घास की नोकों पर,

नमन है, उन कमलों को भी

जिनसे महक रही है प्रकृति,

नमन करता हूँ,

उस औरत को भी जो

शिखर दोपहरी में भी

जाती हर रोज खाना लिए,

नही भूला हूँ

धूल से सने रास्ते को नमन करना

जिस पर

गायों के असंख्य पैर छपे हैं,

लाल आसमान में

उस डूबते सूरज को भी नमन करूं

और

करूं समर्पित इस मन को भी

इनके कर्तव्यों के प्रति ।


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