नव संकल्प नयी तरंग
नव संकल्प नयी तरंग
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नए साल के स्वागत में हम
पलकें रहे बिछाय,
मना रहे नववर्ष कुछ तो
नयी कृपा कर जाए।
न अब आतंकवाद की खबरें
न ही बने आतँकवादी।
कोई कांड निर्भया न हो
न हो मानवता शर्मसार भी।
स्वच्छ रहे तन के संग मन भी
ऐसी जुगत लगाएं,
नए वर्ष के स्वागत में हम
पलकें रहे बिछाय।
जितना आवश्यक हो उतना
खर्चें ईंधन पानी
यह हमारी प्रकृति की थाती
करें नही मनमानी,
बढ़ते प्रदूषण से अपना
पर्यावरण बचाएँ
अपनी प्यारी वसुन्धरा को
हरा-भरा फिर बनाएँ,
जाति धर्म और ऊंच-नीच के
फेरों से कतराएं
एक धर्म और एक ध्वजा के
तले सभी चले आएं,
इन नए संकल्पों से,
आओ नया साल मनाएं
