नुकसान या खुशी...
नुकसान या खुशी...
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हर इंसान की जिंदगी में
बहुत लोग आते हैं और
जाते है
हमारी कामयाबी पर बहुत
से लोगो को जलन होती है
जिसका सीधा असर
हमारे काम पर होता है
लोगो की जलन इतनी
बेकार होती है कि
उसका नुकसान जो
होता है वो कोई भी
भर कर वापस नहीं दे सकता
सिर्फ पैसे मे नुकसान नहीं होता
इंसान हर तरह से टूट जाता है
और चाह कर भी उसकी
भरपाई नहीं हो पाती
जमाना बदल गया है पर फिर भी
लोग पढ़े लिखे है पर फिर भी
कहाँ पर कोई खुश है या नहीं
यह भी देखना होगा
यह ईर्ष्या इतनी बेकार होती है
कि नुकसान हमारा है
बेहतर होगा अगर हम ईर्ष्या
को एक तरफ रखते हैं
और एक नई शुरुआत करते हैं
जिसमे सबकी भलाई है...
