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Rakesh More

Abstract

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Rakesh More

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नहीं मिलता

नहीं मिलता

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हर उठी लहेर को किनारा नहीं मिलता 

हर उठी नजर को नजारा नहीं मिलता 

जिंदगी मे कभी ऐसा भी वक्त आता है दोस्तो 

के रीश्तो के नाम पे अपने तो मिलते है, 

अपनो का सहारा नहीं मिलता।


जिनके लिए आंसू बहाओ वो अक्सर तनहा छोड देते है 

रास्तो पर साथ चलते चलते युंही कही राह मोड देते है 

कौन चाहता है की उसके दिलसे खेले कोई 

खिलौनो की तरह ये बेरहेम दिल तोड़ देते है 

हमसफर मिलेंगे हजारों यहाँ 


दूरतक साथ देनेवाला इशारा नहीं मिलता

जिंदगी मे कभी ऐसा भी वक्त आता है दोस्तो 

के रीश्तो के नाम पे अपने तो मिलते है, 

अपनो का सहारा नहीं मिलता


कौन कहेता है के प्यारकी यहा जीत होती है 

खुदा की इस कायनात मे बस अमर प्रीत होती है 

नोच लेते है यहा बेरहेमिसे दिल को जालीम 

रुला देते है वही हमे जिनसे हमें उम्मीद होती है

 

रुखी सी ठंडी महसूस होती है जिंदगी 

आग लगा दे वो शरारा नहीं मिलता 

जिंदगी मे कभी ऐसा भी वक्त आता है दोस्तो 

के रीश्तो के नाम पे अपने तो मिलते है, 

अपनो का सहारा नहीं मिलता।


कभी यादोंका मौसम बिते लमहोकी बारिश करता है 

कभी दिल के शिशें मे उनकाही अक्स उभरता है 

धुंधले हो जाते है रास्ते बैठे बैठे मंझिलो के 

कभी सामनेसे बिता लम्हा आंख मिलाकर गुजरता है 


जिसकी बाँहों में सुकून महसूस हो 

ऐसा कोई दिलबर हमारा नहीं मिलता 

जिंदगी मे कभी ऐसा भी वक्त आता है दोस्तो 

के रिश्तों के नाम पे अपने तो मिलते है, 

अपनो का सहारा नहीं मिलता।


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