मुक्तक
मुक्तक
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मुझे नहीं पता मैं किस रास्ते से बहती हूं
मैं नादान बस अपनी मस्ती में रहती हूं
मै सरिता सी निर्मल इठलाती बलखाती
बस पल पल अपने सागर को तरसती हूं
अर्चना गोयल 'माही'
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