ईमानदारी और इज़्ज़त को , सर्वोपरी रखा है इसीलिए बेइमानी ने , कभी गला नहीं कसा है।। ईमानदारी और इज़्ज़त को , सर्वोपरी रखा है इसीलिए बेइमानी ने , कभी गला नहीं कसा है...
घटते हुए नैतिक मूल्य से इंसानियत शर्मसार हो रही है, इन्ही भावो को समेटे हुए मैंने इस कविता की रचना क... घटते हुए नैतिक मूल्य से इंसानियत शर्मसार हो रही है, इन्ही भावो को समेटे हुए मैंन...
कि हर पाठ तूने ही पढ़ाया है...! कि हर पाठ तूने ही पढ़ाया है...!
तो क्या बात है...! तो क्या बात है...!
तलवार की धार। तलवार की धार।
हमने दुनिया के गम उठाए हैं...। हमने दुनिया के गम उठाए हैं...।