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Shayra dr. Zeenat ahsaan

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Shayra dr. Zeenat ahsaan

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मज़ा आता है

मज़ा आता है

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भूलना मुश्किल है बड़ा याद आता है

मुझे आज भी वो अपना घर याद आता है

कमरे की उसारी, दहलान का झूला

छोटी बुआ का मुंह रहता था फुला

चूल्हे की चाईया, रोता था भैय्या

जहां मैं जन्मी वो घर आंगन याद आता है


अम्मा की सूरत

ममता की मूरत

वो घास के पुले

सावन के झूले

पिंजरे में टंगा वो तोता याद आता है


बारी में मुर्गी, आंगन में धूप

अम्मा की रोटियां वो नदिया वो कूप

दद्दा की खाट वो हुक्का याद आता है

वो जंगल, वो पहाड़, मोगली के संग बघीरा की दहाड़

मुझे मध्यप्रदेश सिवनी का वो जंगल याद आता है


वो शंकरमठ की आरती, मस्जिद की अज़ान

कोयल की कुह कुह की सुनते थे तान

फागुनी टेसुअन का रंग लाल याद आता है


बारी में लगी कद्दू की बेला, हाट बाज़ार में गोलगप्पे का ढेला

खेतो में लहराती अलसी और धान

नदी किनारे बड़ा शमशान

बैलगाड़ी में लौटते गांव के किसान

चम्पा चमेली और मोगरे के फूल, गोधूली बेला में उड़ती थी धूल

ईद, दीवाली दशहरे का वो दिन याद आता है


गांव की रामलीला में भद्दू की घोड़ी

राम लखन की प्यारी वो जोड़ी

नस्सू चचा की बेलो की जोड़ी

ये मंज़र मुझे बड़ा याद आता है

मुझे बार बार बुलाता है

सच यहां पहुंच कर बड़ा मज़ा आता है।


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