STORYMIRROR

Rajni Sharma

Others

2  

Rajni Sharma

Others

मेरी वसीयत सच्चे दोस्त

मेरी वसीयत सच्चे दोस्त

1 min
304


ज़िन्दगी जो मिली 

तो एहसास बनते गए 

दोस्ती के पाक दामन में 

न कोई स्वार्थ चले।


परेशानी तो आज है 

सुकून कभी आयेगा 

मेरा दोस्त ही मेरा खुदा है 

कब तक मुझे रूलाएगा।


जब मिलेगी वो 

जन्नत का नूर बरसेगा 

चेहरा उसका मोम होगा 

देखकर मुझमें पिघलेगा।


पवित्र रिश्ते में जो भी मिला 

सफर ये कटता गया 

सुबह से शाम कब हुई 

इन सांसों को न पता चला।


मित्रता की मंजिल में 

जो भी पूंजी मुझे मिली 

मेरी वसीयत बनती गयी 

ऐसा लगा सब विरासत में

बिन मांगें मिलती गयी।


यही एक रिश्ता है 

जिसका इतिहास मैने रचा, 

सोच कर खुश हूँ 

ऊपरवाले ने खाली झोली

सच्चे दोस्तों से भर दिया।





विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन