STORYMIRROR

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Others

4  

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Others

मेरी माँ

मेरी माँ

1 min
285

मैं एक शब्द हूँ तुम पूरी भाषा 

मैं कुंठित हूँ तुम एक अभिलाषा 

निज अवगत मुझे तुम्हारी ममता की छाया

पल पल भींगता जाऊँ स्नेह में तुम्हारे

बस यही मेरी अभिलाषा बनी रही मेरी माँ 

मेरा तुमसे ही परिभाषा 


मैं समुंदर एक लहर मात्र है तुम झरनों का निर्मल स्वर 

मैं एक शूल सा खड़ा राह में तुम सहस्त्र ढाल प्रखर


मैं तुम्हारे स्वर से सृजित कामिल श्रृंगार सा

तुम उसकी अनुक्रमणिका 

मैं निष्ठुर पाषाण सा अडिग हृदय

तुम कोपल कंचन की कृनीका 

निज अवगत मुझे तुम्हारी ममता की छाया

पल पल भींगता जाऊँ स्नेह में तुम्हारे

बस यही मेरी अभिलाषा बनी रही मेरी माँ 

मेरा तुमसे ही परिभाषा 


मैं राजा दुलारा बेटा तुम्हारा तुम मेरी प्यारी मम्मा

तुम ही सरस्वती का उद्गम हो दुर्गा, राधा और चण्डिका 

मैं एक शब्द हूँ तुम पूरी भाषा 

मैं कुंठित हूँ तुम एक अभिलाषा 

निज अवगत मुझे तुम्हारी ममता की छाया

पल पल भींगता जाऊँ स्नेह में तुम्हारे

बस यही मेरी अभिलाषा बनी रही मेरी माँ 

मेरा तुमसे ही परिभाषा 


Rate this content
Log in