मेरी कविताएं
मेरी कविताएं
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जी मैं जो आया लिखा और गीत सा बनता गया
साज अंतस का मेरे संगीत सा बनता गया
शब्द का सागर उठा और उंगलियां कपने लगीं
अच्छरों का सरल धागा प्रीत सा बनता गया
मजहबों की बात औरों से करो पैगम्बरो
हमको मानव रहने दो थोड़ा तो उस रब से डरो
काली स्याही से लिखी तकदीर अपनी राम ने
जब दुखों हार पहना जीत सा बनता गया।
