मेहनत
मेहनत
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इन हाथों की कालिख़ नहीं
इनकी मेहनत को देखो।
जो बच्चे दिन भर लगे रहते है
अपने परिवार के साथ,
उनकी मजबूरी को समझो।
नहीं चाहते है वो भी कि
उनके बच्चे मजदूरी करे।
चाहते है वो भी कि
उनके बच्चे पढ़ लिखकर आगे बढ़े।
पर जरुरतें और हालात
उनसे सब कुछ करवा लेते है।
ना चाहते हुए भी वो दिल और
अपने दिमाग को समझा लेते है।
