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VIVEK ROUSHAN

Others

4.0  

VIVEK ROUSHAN

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मौत ज़्यादा देता है

मौत ज़्यादा देता है

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शहर की चकाचौंध में फँसा आदमी

जीत और हार के बीच की खाई को

भरने में असमर्थ आदमी

शहर में रहना अच्छी बात है

उसके बनाये राहों पर

चलना अच्छी बात है

पर राहों पे चलते वक़्त लड़खड़ा

जाना यहाँ गलत बात है

लड़खड़ाकर गिर जाना

यहाँ बुरी बात है

गिरना यहाँ हारने के समान है

और हारना मरने के समान

यहाँ हारने वालों का

कोई साथ नहीं देता

हर हार यहाँ आदमी को

मृत्यु के करीब लेकर जाती है

यहाँ हारने का मतलब है

खुद को पल-पल मरने

के लिए तैयार करना

यहाँ जीत को सर्वोपरी रखा गया है

प्यार जितने वालों के पास

दोस्त जीतने वालों के पास

दुनियाँ की हर ख़ुशी जीतने

वालों के पास

ये शहर तन पर लगे कपड़ों को

देखकर आदमी को अहमियत देता है

ये शहर आदमी को नहीं पैसों

को अहमियत देता है

ये शहर आदमी को जिंदगी कम

मौत ज़्यादा देता है |


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