STORYMIRROR

Anand Kumar

Others

3  

Anand Kumar

Others

मैं एक वक्ता हूँ बस

मैं एक वक्ता हूँ बस

1 min
283

कोरा कागज़ सा था,

ये दिल मेरा, इसमें 

सभी रंग मोहब्बत के

तुमने थे भरे। 


आज तुम तो नहीं हो, पर  

एक कहानी लिखने बैठा हूँ, 

स्याही मेरे कलम की 

प्यार है तुम्हारा,

हर रंग जो इससे निकलेगा, 

वो तुम्हारा होगा, 

हर भाव तुम होगी ।


ये प्रसंग प्रेम का होगा,

इसकी प्रेरणा तुम हो 

स्त्रोत भी तुम ही हो,

मैं बस एक माध्यम हूँ, 

इसका, हर कारक तुम हो

मैं एक वक्ता हूँ बस

इसकी आत्मा तुम हो ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन