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D.N. Jha

Others

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माता के नौ रूप (स्वरचित दोहे)

माता के नौ रूप (स्वरचित दोहे)

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माता के नौ रूप में, आती हैं हर बार।

फूलों से हैं सज रहे,देखो अपने द्वार।।


माता के नौ रूप की, महिमा अद्भुत जान।

आओ मिलकर ही करें,इनका ही गुणगान।।


 कन्याओं को मानते, माता के नौ रूप‌‌।

माता अपने साथ हैं, छाया हो चाहे धूप।।


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