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Anita Chandrakar

Children Stories

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Anita Chandrakar

Children Stories

मासूमियत बचपन की

मासूमियत बचपन की

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दुनिया भर की दौड़ लगाते, बन जाते वे छुकछुक रेल।

धूल मिट्टी गलियाँ आँगन में, तरह तरह के खेले खेल।

दुनियादारी से क्या लेना, पल में झगड़ा पल में मेल।

निष्कपट निश्छल बचपन, रखते न मन में कोई मैल।

धूप हो या हो बारिश, वो तो है अपने मन का राजा।

कभी चलाते कागज की कश्ती, कभी बजाते बाजा।

पेड़ों पर चढ़ते, झूला झूलते, तोड़े फल मीठा ताजा।

उनकी टोली धूम मचाती, खोले ख़ुशियों का दरवाजा।

तारों में ढूँढे चोर सिपाही, चाँद में पा लेते वे बुढ़िया।

तितली के पीछे भागते, कभी चढ़ते छत की सीढ़ियाँ।

दादा दादी से सुने कहानी, माँ से सुने मधुर लोरियाँ।

पल भर में आती मीठी नींद, सपनों से भरी अँखियाँ।



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