माँ! तुम्हारे चरणों में।
माँ! तुम्हारे चरणों में।
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भंडार सकल कल्याणों का, माँ तुम्हारे चरणों में।
जीवन धन आनंद मिले, माँ तुम्हारे चरणों में।।
नहीं कर्म ,ज्ञान नहीं , नहीं भक्ति, विषयों में जिसकी अनुरक्ति।
उसको ही तारन की शक्ति ,हे माँ! तुम्हारे चरणों में।।
कलि में सब साधन विघ्न भरे, भव सागर से कोई कैसे तरे।
तर जाए अगर विश्वास करे, हे! माँ तुम्हारे चरणों में।।
भव रोग नाश की है बूटी, हे! माँ तुम्हारे चरणों में।
प्रतिपल बढ़ता प्रेम रहे, हे! माँ तुम्हारे चरणों में।।
