STORYMIRROR

Jyoti Gupta

Others

2  

Jyoti Gupta

Others

माँ मेरी

माँ मेरी

1 min
115

मिली जन्नत से हमे जब लाड

स्नेह में उसके हम फिर फंस गए


ममता के उस जहां में 

क्रीड़ा करते हम फिर रह गए


होश न रहा इस जग का

की हम यू किधर फिर फंस गए 


राज है कैसा इस आंचल का

की सहारा इसी का फिर लेेते रहे


माँ के इस ममता के  जादू से 

हम को यूँ दुआ फिर मिलती रही


होके पीछे हम सबसे 

मंजिलो का किनारा फिर मिलता रहा 


ममता के आंचल से 

हम को दुआ फिर मिलती रही।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन