STORYMIRROR

Mithilesh kumari

Others

2  

Mithilesh kumari

Others

लेकिन

लेकिन

1 min
229

जानती हूँ कि भरा पूरा

साम्राज्य है तुम्हारे पास

जिसमें मेरी कोई जगह नहीं

लेकिन एक तुम्ही हो

जिससे बात करने

मिलने के लिए

मैं बेचैन हूँ।


रोज़ रोज़ अपनी उम्मीदों

की क्यारी सींचती हूँ

कि एक दिन अंकुर से

पौधा बनेगा और लहलहाएगा

तुम आओगे एक दिन ज़रूर

वह दिन मेरी मौत से

पहले का ही सही ।।



Rate this content
Log in