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Mithilesh kumari

Others

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Mithilesh kumari

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लेकिन

लेकिन

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जानती हूँ कि भरा पूरा

साम्राज्य है तुम्हारे पास

जिसमें मेरी कोई जगह नहीं

लेकिन एक तुम्ही हो

जिससे बात करने

मिलने के लिए

मैं बेचैन हूँ।


रोज़ रोज़ अपनी उम्मीदों

की क्यारी सींचती हूँ

कि एक दिन अंकुर से

पौधा बनेगा और लहलहाएगा

तुम आओगे एक दिन ज़रूर

वह दिन मेरी मौत से

पहले का ही सही ।।



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