कृष्ण जन्माष्टमी की रात
कृष्ण जन्माष्टमी की रात
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भाद्रपद अष्टमी की रात थी
वो काली अंधियारी रात थी
देवकी की अष्टम सन्तान थी
होनी बड़ी बलवान थी।
कौंध गई थी बिजलियाँ
गर्जना चारों ओर थी
बादलों ने थी ख़ुशी मनाई
बरसात खूब थी बरसाई।
आकाशवाणी थी हो रही
कंस भयभीत था हो रहा
डरावना सपना था सच हो रहा
कालचक्र तेज़ था घूम रहा।
जन जाति का उद्धार करने
पापियों का संहार करने
आ रहा था बन के इंसान
वो मेरा कृष्ण, गिरिधर गोपाल।
