STORYMIRROR

सतीश शेखर श्रीवास्तव “परिमल”

Others

4  

सतीश शेखर श्रीवास्तव “परिमल”

Others

करें इंतज़ार चलो चाँद का

करें इंतज़ार चलो चाँद का

1 min
297

सरिता कूलों के अवार में बैठकर

बनायें घर – घरौंदे हम सपनों के

इकट्ठी करें सीप शंखियाँ ढेरों

यादों की परियाँ भव का त्रास। 


बोझिल नम पलकें झुकी – झुकी

आज अकेले से तुम क्यूं हमजोली

उलझी – उलझी गाँठें मन की

आगे आ किसलिये गूढ़ी न खोली। 


खोज लायें बीते पल चलो

बांहों में डाले बाजुओं को

अबोल अँखियों से दे चले फिर

इक – दूसरे को पूरा विश्वास। 


श्याम-धवल बदरा उमड़े

झिम-झिम कर पड़े फुहारें

भीज रहे रसाल मौसम में

तृषित-तृषित से प्राण पुकारें। 


चलो सराबोर करें तपते तन-मन का

संतुष्ट करें दहती अभिलाषा

बह जायेगा सारी वेदनाएं

ठंडी होगी तब सुलगती साँस। 


भरी धुंध की धूमिल साँझ

सित – सित सा है आकाश

सरस प्रणय को मचले हो आतुर

दोनों के अतृप्त-अतृप्त भुज पाश। 


करें इंतजार चलो चाँद का

महक रहे महुआ के फूल

सुगंधमयी होगी रजनीगंधा 

खिल उठेगी तमा उदास। 


वक्त ने छीन ली मुस्कानें

जीवन श्रापित हो गया जैसे

मुग्ध प्रणय के पुनीत क्षण

श्राप से हो गये पाप जैसे। 


चलो उड़ती तितलियाँ पकड़ें

नये – नये सतरंगी सपने बुनें

सबके होंठों पर मुस्कुरायेंगे

खिल कर प्रीति भरे मधुमास।। 



Rate this content
Log in