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अर्चना तिवारी

Children Stories

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अर्चना तिवारी

Children Stories

कोयल

कोयल

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देखो तरु पर कोयल आई, 

मीठी इसकी बोली l

दसो दिशा में कूक -कूक कर ,

इसने मिसरी घोली l

तुम बाहर ही क्यों उड़ती हो ,

घर के भीतर आओl 

ऐसे क्या देखा करती हो,

मुझको भी बतलाओ l

रंग तुम्हारा काला है पर, 

मन की हो तुम भोली l

मीठे गीत सुनाकर तुमने ,

आँख हमारी खोली।

कैसे तुम यह सब करती,

कैसे मीठे वचन सिखाती

सबसे मिलजुल रहना , 

तुम तो हो सिखलाती l


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