कलम
कलम
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कलम
इंसान की अद्भुत कृति
शुरूआत चाहे कोयला,
पंख या हो लकड़ी से
पैन/स्याही/पैंसिल कमाल।
पर,
आज आधुनिक युग में
दोस्त है मानव का
शस्त्र है निहत्थे का
रोजी रोटी इंसान की।
अलग अलग नाम
अलग अलग रूप
आकर्षित करते जो
छोटे बड़े सब को।
अभिव्यक्ति करावे
मन का बोझ घटावे
आगे की राह दिखावे
मन भी दृढ़ हो जावे।
कलम मेरी कागज पे लिखे
आत्मा की आवाज सुने
लिखे हर भाव शाम सवेरे
बसे हर पल दिल में मेरे।
तेरा साथ चाहूँ जीवन भर
मैं सोचूँ तू लिखे पल हर
अपनी हर बात साझाँ कर
कवि बन इतराऊँ खुद पर।
