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Ramanpreet -

Others

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कलम और खयाल

कलम और खयाल

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कलम और खयाल का

क्या खूब है नाता

एक दूजे के बिना

जो अधूरा हो जाता

जो कलम शब्दों की मालिका 

तो खयाल शब्दों का राजा है

सोचो ज़रा ये मनचला राजा

कैसे इस सटिक मालिका 

को बहलता है 


जो चाहे वो ही

इससे लिखवाता है

देखो तो लगता है की

ये अपनी तानाशाही चलाता है

लेकिन जो पूछा कलम से तो बोली

यही तो प्यार में समर्पण कहलाता है

एक ने कही दूजे ने मानी का

हमारा प्रेम उच्च उधारहण दर्शाता है।



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