खुदगर्ज प्रेम
खुदगर्ज प्रेम
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जरूरी है क्या हर रिश्ते में प्रेम हो?? या हर प्रेम में त्याग हो??
कुछ रिश्तों के दीप में प्रेम की लौ नहीं होती,
और कुछ प्रेम के सागर में त्याग की लहरें नहीं होती. . .
प्रेम में त्यागी होना सही है, तो खुदगर्ज़ होना क्यों नहीं??
मैं त्याग दूं अपने हिस्से की खुशी ये सही तो नहीं,
अगर सहना ही प्रेम है, तो खुद की खुशी के लिये रिश्ता तोड़ना क्यों नहीं??
तुम से प्रेम करना सही था, तो खुद से करना क्यों नहीं??
