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Nand Kumar

Children Stories


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Nand Kumar

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कानपुर की सैर

कानपुर की सैर

1 min 315 1 min 315

सुबह सबेरे बच्चों के संग , 

हम सबआए बस के पास ।

बैठ गए मिल सब ही जन ,

मन में सबके परम हुलास ।।


जाना था हम सबको , 

करने नगर कानपुर सैर ।

बैठ गए बस चली सभी, 

ने फिर फैलाए पैर ।।


नगर ग्राम सब छोङ, 

बढ रही अपनी गाड़ी ।

आ विठूर गंगा मे सबने , 

प्रमुदित डुबकी मारी ।।


खूंटी ब्रम्हा बाल्मीकि ,

आश्रम आ शीश नवाया ।

नाना के बिठूर पैलेस मे , 

बैठ के खाना खाया ।।


ऐतिहासिक संग्रहालय देखा ,

देखा उनका भग्न ठिकाना ।

यही मनू का बचपन बीता ,

बाल सखा थे नाना ।।


फिर मिलकर सब आए, 

जू मे वातावरण सुहाना ।

खग पशु दिव्य अलौकिक, 

 देखे नही खुशी का ठिकाना ।।


रंग विरंगी तितली देखी , 

देखी छोटी सी गाड़ी ।

फिर आए ईस्कान कृष्ण ,

मंदिर में रोकी गाड़ी ।।


माथ नवाया कृष्ण चन्द्र को, 

जिनके संग राधा रानी ।

जिनकी कृपा प्राप्त कर , 

प्रमुदित हो जाए हर प्राणी ।।


मग में देख शुधांसु आश्रम , 

उतर गए हम सब साथी ।

शिव के दिव्य दरश कर सबने, 

देखे पत्थर के सुन्दर हाथी ।।


देव गुफा में जाकर सबने , 

देवों को है शीश झुकाया ।

हुई शाम चल पड़े घरों को , 

यात्रा का सुख पाया ।।



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