जितना लुटा उतना चमका मेरा भ
जितना लुटा उतना चमका मेरा भ
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जितना लुटा उतना चमका
मेरा भारत देश,
सोने की चिडि़या मेरा भारत
कभी लूटा विदेशी दुशमन ने,
कभी स्वदेशी ढ़ोंगियो ने
पर मेरा देश तो भारत है,
खजानो से भरपूर
प्रकाश से सरा बोर
किसी लूट से
ये कभी गरीब नहीं हुआ,
अपितु इसकी अमीरी
बढ़ती ही गयी
जितना लुटा उतना चमका,
मेरा भारत देश.
फीनिकस जैसे अपनी ही माटी से
उगता और चमकता रहा
मेरा भारत देश
जितना लुटा उतना चमका
मेरा भारत देश.
गर्व है ! नाज है !तुझ पर मुझको
ए मेरे देश !
हिमालया सा ही सख्त जान है तू.
लाख आये बेईमान यहाँ
पर बिगडा़ न मेरे देश का ईमान कभी
ऐसा महान तेज मेरे देश का
जितना लुटा उतना चमका
मेरा भारत देश मेरा भारत देश.
