STORYMIRROR

बबिता प्रजापति

Others

4  

बबिता प्रजापति

Others

जी करता है....

जी करता है....

1 min
358

जी करता है कल्पना का

रच लूँ एक संसार,

प्रेम हो स्नेह हो

लोगों के ह्रदय में अपार।

कलकल करती नदियां

जल हो आरपार,

फूल फल से लदी

झुके तरु की डार।

नीलम सा अम्बर हो

हो तारों का अंबार,

खाट डाल के आंगन सोएं

हो ह्रदय की बातें हज़ार।

रक्ताभ हो रश्मिरथी

गिरी से हो उदगार,

चहुँ दिश पुष्पों से सजे

हो भ्रमरों का गुँजार।

कृष्ण नाम जपते रहें

हो देवालयों से उच्चार,

शंख घण्टे घड़ियालों से 

गुंजित हो घर द्वार।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन