झील सी आंखों में
झील सी आंखों में
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तुम्हारी अदा की रजा क्या है,
यह तो मुझे पता नहीं।
यह दिल तुम्हें छेड़ दे,
तो इसमें मेरी खता नहीं है।।
लगता है डर कहीं डूब ना जाऊं,
तुम्हारी झील सी आंखों में।
दिल भी आवारा है,
इसलिए बंद कर दिया सलाखों में।।
क्या करें जुबां पर आ ही जाते हैं शब्द
कितना भी बंद रखो सलाखों में।।
