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Kumar Vikash

Others


4.8  

Kumar Vikash

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जब मैं बच्चा था

जब मैं बच्चा था

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पन अच्छा था,

जब मैं बच्चा था !

ना कोई मंजिल थी,

ना कोई रास्ता था !

पल में रोता था,

पल में हँसता था !

एक पल सोता था,

एक पल जगता था !

चलता था गिरता था,

गिरकर फिर उठ चलता था !

क्या अपना क्या पराया था,

मैं सब से मिल मुस्कुराया था !

न गोरा था न काला था,

मेरा दिल तो कृष्ण उजाला था !

न विष की पोटली दिल में थी,

ये दिल तो अमृत प्याला था !

जब मैंने ये बचपन खोया था,

तुम यकीन करो मैं रोया था !

क्योंकि वो पन अच्छा था,

जब मैं एक बच्चा था !!


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