जब आया दर माँ मैं तेरे
जब आया दर माँ मैं तेरे
जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।
सबसे पीछे खड़ा हुआ था, भीड़ बड़ी थी मैया जी।
मेरी करुण पुकार सुनी ,
खुद कानों ने भी मेरे नहीं।
किंतु कृपा थी तेरी ऐसी,
मन में मेरे वहीं बसी ।
हृदय से मेरे भगा अंधेरा, कांतिमान थी ज्योति-सी।
जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।
और नहीं अब चाह किसी की,
राह तेरी जो मैं पाया।
भाग्य खुले उस दिन ही मेरे,
भजन तेरे जो मैं गाया।
जगती में है द्वार कई, कहीं नहीं इस ड्योढ़ी-सी।
जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।
मैं अज्ञानी शब्द-हीन,
बिन तेरी दया कैसे गाऊँ।
जो तू मुझको सुझाती है माँ,
बात वही फिर दोहराऊं।
गूंजे मेरे हृदय में मैया, तान सदा तेरी वीणा-सी।
जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।
