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Ghanshyam Sharma

Others

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Ghanshyam Sharma

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जब आया दर माँ मैं तेरे

जब आया दर माँ मैं तेरे

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जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।

सबसे पीछे खड़ा हुआ था, भीड़ बड़ी थी मैया जी।


मेरी करुण पुकार सुनी ,

खुद कानों ने भी मेरे नहीं।

किंतु कृपा थी तेरी ऐसी,

मन में मेरे वहीं बसी ।

हृदय से मेरे भगा अंधेरा, कांतिमान थी ज्योति-सी।

जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।


और नहीं अब चाह किसी की,

राह तेरी जो मैं पाया।

भाग्य खुले उस दिन ही मेरे,

भजन तेरे जो मैं गाया।

जगती में है द्वार कई, कहीं नहीं इस ड्योढ़ी-सी।

जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।


मैं अज्ञानी शब्द-हीन,

बिन तेरी दया कैसे गाऊँ।

जो तू मुझको सुझाती है माँ,

बात वही फिर दोहराऊं।

गूंजे मेरे हृदय में मैया, तान सदा तेरी वीणा-सी।

जब आया दर माँ मैं तेरे, आंख भरी थी दरिया-सी।


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