जाने क्यों बदलती जा रही हूं
जाने क्यों बदलती जा रही हूं
1 min
286
जाने क्यों मैं बदलती जा रही हूं
हर बात को अब मैं लिखे जा रही हूं
गंभीर रहने वाली बात बात में
उछलती जा रही हूं।
कभी नाचती, कभी गाती
जाने क्यों बदलती जा रही हूं
अपनों को स्वीकारती और
परायों को अपना मानती।
खुश रहती दूसरों के दुख दर्द दूर करती
जिम्मेदारियों को खुशी से निभाए जा रही हूं
जाने क्यों मैं बदलती जा रही हूं
शायद लेखिका बनती जा रही हूं।
ईश्वर की अनमोल कृति को सवारे जा रही हूं
क्योंकि अब मैं लेखिका बनती जा रही हूं।
