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D.N. Jha

Children Stories

4  

D.N. Jha

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हरियाली

हरियाली

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सावन की छटा निराली,

छाई है कैसी हरियाली।


पेड़-पेड़ और डाली-डाली,

झूम रही धानों की बाली।


आसमान में छाई बदली,

मोरनी नाच रही मतवाली ।


प्रकृति की है शोभा निराली,               

छाए जब उन पर हरियाली।


गीत गाए दादुर की टोली, 

मन भाए झिंगुर की बोली।



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