हर तरफ इश्क़ का बाजार फैला है
हर तरफ इश्क़ का बाजार फैला है
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आखिर क्यों बंद नहीं करती,
इश्क़ में पलकें आंखों को,
दिल में याद नींद नहीं आती,
बंद करती पलकें आंखों को।
यूं ही बेखबर होकर हर पल,
सिलसिला चलता ही रहता है,
प्यार जिसे कहते हाल-ए-दिल,
वह बताने को नहीं होता है।
लोग बहुत मिले जान लुटाये,
हाल-ए-दिल दुनिया दिखाये,
सच्चा प्यार मिला किसे जमाने में,
जिंदगी में यह तय नहीं कर पाये।
आज गली चौबारे बाग बगीचे,
सब फोन पर बने मंजनू लैला है।
अब इश्क का मतलब ही छोड़ दे,
हर तरफ इश्क़ का बाजार फैला है।
