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Jaiprakash Agrawal

Others

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Jaiprakash Agrawal

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होली

होली

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आओ खेलें होली

भूलें सब गिले शिकवे

सब मिल करें ठिठोली

आओ खेलें होली।


भींगे रंग मे चुनरिया

बह जाए सब कजरिया

आज तू मेरी होली

आओ खेलें होली।


चांद सा तेरा रूप यौवन

उसपर लज्जा का आवरण

खेल रहे आंख मिचौली

आओ खेलें होली।


संकोच के सारे बंधन तोड़े

प्रेम कड़ी से सबको जोड़े

तिरंगे की बने रंगोली

आओ खेलें होली।


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