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Akanksha Gupta (Vedantika)

Others

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Akanksha Gupta (Vedantika)

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होली के दिन

होली के दिन

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जब तुमने रंग लगाया था,

उस होली के दिन।


इंद्रधनुष उतर आया था,

उस होली के दिन।


लाल रंग में डूबा हुआ,

मेरा प्रेम तेरा सिंदूर।


कह रहा है तुझसे प्रिय,

कभी ना होना मुझसे दूर।


रंग घुली पानी की फुहारें,

जब जब तुझ पर पड़ती थी।


रंगीन लकीरें तब तब तेरे,

तन श्रंगारित करती थी।


नया आयाम पाया था मैने,

उस होली के दिन।


जब तुमने रंग लगाया था,

उस होली के दिन।


इंद्रधनुष उतर आया था,

उस होली के दिन।



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