हम और राम
हम और राम
समझ आता है,,,,
अपने राम और उनका काम
सुकुमार ,राजकुमार, शाही अंदाज
संघर्ष, सौम्यता और सत्य मार्ग
माताओं का प्यार,राक्षसों का संहार
प्राण जाय पर वचन रह जाय
ऐसे ही थे पुरुषोतम 'राम'
लेकिन,,,
हम हर कदम अपने वचनों
का ही उड़ाते उपहास!
मां के 'वचन' निभाना
भाई को 'स्नहे' देना
पिता को 'गौरव' बढ़ाना
पति का 'कर्त्तव्य' निभाना
प्रजा को करते 'प्यार', राम।
देश राज्य सदा रहा सर्वोपरि
तब राम-राज्य कहलाया
लेकिन,,,
जिम्मेदारी से भागते हम
नियमों की अनदेखी करते हम
बीते समय की बात,कहते हम।
रखते नाम बच्चों के' राम'
ताकि रहे उनके संस्कार
रूपवान, आदर्श श्री राम
हम सब में करते वास।
बस चाहते व रखते नाम
उनके जैसा बनना ,ना आसान
किसी के लिए भी आसान??
शायद इसी लिए कहते भगवान।
मजबूरी बता,लेते पल्ला झाड़
समय नहीं ,हो नही सकता?
वो समय था कुछ और
जीने के ये नया अंदाज।
अधूरा सच मान, करते
सामाजिक ,भ्रष्टाचार
बचने को करते ,कदाचार
राम को करते,केवल प्रणाम।
हमने स्वार्थ को किया हावी
अनुसार रिश्तों को निभाया
माता-पिता भाई गौण है
बच्चे पत्नी के लिए मौन है?
रहो संयमित ,सदाचारी
कुछ तो लो संस्कार
नाम रखो कोई भी
आचरण रखो राम सा
तभी होगा सब का उद्धार।
