हिम्मत
हिम्मत
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समेटने के लिए हमें ही करना होगा अब कुछ
इतना आसान नहीं है फिर से समेट पाना
मन में लगी चोट को सहलाना
पर वक्त हर ज़ख्म भर देता है
फिर खड़े होने की हिम्मत भी दे देता है।
