STORYMIRROR

Savita Gupta

Others

3  

Savita Gupta

Others

गुलाब

गुलाब

1 min
267

  


फूलों का मै राजा हूँ 

सब को मैं भाता हूँ 

कई रंग कई क़िस्में 

कहीं भी खिल जाता हूँ।


काँटों से लिपटा हूँ 

फिर भी मुस्कुराता हूँ 

सीख लो मुझसे जीना

बाधाओं से है लड़ना।


कली भी मेरी लुभाती है

अपनी ओर बुलाती है

नारी जूड़े में मुझे सजाती है

नर भी खिंचे चले आते हैं

अचकन में टाँक इतराते हैं।


आँखों को ठंडक देता हूँ 

इत्र से बदन महकाता हूँ।

गले का हार सेज का श्रृंगार

मुहब्बत का इज़हार।


गांधीगीरी नेहरु का प्यार

महकता ख़ास उपहार हूँ।

अंतिम यात्रा में हो शामिल

मैं भी तो सिसकता हूँ ।


टुटती है जब पंखुड़ियाँ 

दर्द मुझे भी होता है।

हर मज़हब प्यार लुटाता है

काम आ सका किसी के

मीठा एहसास दिलाता है।


जीवन भी एक बगिया है

हर क्यारी में शूल और फूल

ख़ुशियाँ बाँटो ग़म को भूल

बन कर ताज़ा गुलाब का फूल।


        




Rate this content
Log in