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राजेश "बनारसी बाबू"

Children Stories Inspirational

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राजेश "बनारसी बाबू"

Children Stories Inspirational

ग्रीष्म ऋतु के वो दिन

ग्रीष्म ऋतु के वो दिन

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ग्रीष्म ऋतु आ गया,

मस्ती अब तो छा गया।

स्कूल अब बंद हुए,

मस्ती के दिन अब शुरू हुए।

आइसक्रीम वाला आयेगा,

मजा बहुत आयेगा।

गर्मी की छुट्टी के ये हसीन दिन

फिर से शुरू हुआ।

हम स्कूल के बच्चे के,

चेहरे खुशी से अब खिल उठे।

मोटे मोटे कपड़े से,

अब तो निजात मिली।

गली में धमा चौकड़ी,

अब तो शुरुआत हुई।

लंगड़ा आम की मिठास 

कैसी ये महक उठी?

पापा से मंगाने को,

प्रीति दीदी उठ खड़ी हुई।

ये गर्म कैसा लग रहा ?

हवा कैसा चल रहा ?

अब तो हर घर में ,

कूलर ऐ.सी चल रहा?

ये गली में कैसी हुड़दंग है?

पापा दीदी सब संग है।

क्रिकेट के टीम में

 दीदी पापा अब संग है।

ग्रीष्म काल का ये भी दिन 

बड़ा मजेदार है।

ये कैसा कॉल आया है ?

लगता स्कूल खुलने वाला है?

आज दीदी और मेरा

 चेहरा भाव अजीब होने वाला है?

होमवर्क की सिलसिला शुरु हुआ? 

मेरा और दीदी का मुंह खूब बना।

ग्रीष्म काल का छुट्टी अब जाकर खत्म हुआ।



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