STORYMIRROR

Kashif Ahsan

Others

4  

Kashif Ahsan

Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
318

बिछड़ तो जाएगा लेकिन ख़फा नहीं होगा 

वो  एक शख्स जो मुझसे जुदा नहीं होगा 


बहुत गिराया है ख़ुद को किसी की उल्फत मे 

मगर ये  जुर्म भी अब की दफा नहीं होगा 


तुम्हारे बाद भी ज़िन्दा हूँ और ख़ुश भी हूँ 

तुम्ही बताओ कि अब मुझसे क्या नहीं होगा


किसी की याद ने शायर बना दिया मुझको 

ये ऐसा क़र्ज़  जो मुझसे अदा नहीं होगा 


चला गया जो मुझे छोड़ के किसी के लिए 

तमाम उम्र अब उससे गिला नहीं होगा 


हाँ दिल तो रोएगा तड़पेगा बिल बिलाएगा 

मगर ये ग़म मे तिरे मुब्तला नहीं होगा 


इसी वजह से तो दुश्मन अज़ीज़ हैं काशिफ 

हमारी पीठ मे अब के छुरा नहीं होगा।


Rate this content
Log in