मेरे हम सफर
मेरे हम सफर
1 min
224
हसींन ख्वाब के मंज़र तलाश करते हुए
मै थक गया हूँ तिरा घर तलाश करते हुए
खुद अपने आप की नज़रो मे ही गिरा हर बार
वो मेरे हाथ मे पत्थर तलाश करते हुए
किसी फरेब मे गुज़री ये ज़िन्दगी मेरी
कोई हसीन सा दिलबर तलाश करते हुए
न जाने कौन से दु:ख में था मुब्तला कातिल
वो खुश नही था मिरा सर तलाश करते हुए
मेरे रकीब अभी तक हैं मुब्तला-ए-ग़म
मिरे वजूद का पैकर तलाश करते हुए
न जाने कितने ही शाहों ने खुद कुशी कर ली
हमारे हाथ के जौहर तलाश करते हुए
बदन दरीदा तो छलनी है पैरहन काशिफ
मै रो पड़ा हूँ मुकद्दर तलाश करते हुए।
