यह ज़िन्दगी है यारों, यहां रोज़ लगता एक मेला है। यह ज़िन्दगी है यारों, यहां रोज़ लगता एक मेला है।
A poem about changing the centres A poem about changing the centres
जब जिंदगी जीने की तमन्ना हो मुझे, तो मौत से भी मैं कर लू राबता ! जब जिंदगी जीने की तमन्ना हो मुझे, तो मौत से भी मैं कर लू राबता !
करने को अंकित कुछ अपने निशाँ आज क़लम पुनः मैं उठाता हूँ । करने को अंकित कुछ अपने निशाँ आज क़लम पुनः मैं उठाता हूँ ।
इस दौड़-भाग वाली जिंदगी में, यहाँ इंसान इतना सब के पीछे भागता है! इस दौड़-भाग वाली जिंदगी में, यहाँ इंसान इतना सब के पीछे भागता है!
कभी लड़ाई कभी खिंचाई, कभी हँसी ठिठोली थी कभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थी। कभी लड़ाई कभी खिंचाई, कभी हँसी ठिठोली थी कभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली...