STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Others

3  

Mukesh Bissa

Others

एक सफर

एक सफर

1 min
11.4K


अपने सफर में

सबसे हूं दूर

एकाकी ही चलता हूँ

अहसासों की कच्ची सड़क पे

अपनी ही सोच की दीवार तले

पली बढ़ी मैं

हर बार अलग हो जाता हूँ सबसे,

अकेलेपन का दर्द

छोटा पड़ जाए

अगर मैं अपने विचारों को

 फलीभूत कर सकूँ,

लेकिन विचारों का 

साकार होना अभी शेष है

बाकी है अकेलापन,

कुछ चोटें 

कुछ रिस रहे घाव

तब भी

सबसे जुड़ने

सबके देने

सबसे पाने का सपना

अभी बाकी है,

पूरा होगा कभी सपना मेरा

या सबसे जुड़कर भी

अकेला ही रहूंगा मैं,

ज़िंदगी के इस मोड़ का

हिसाब अभी बाकी है



Rate this content
Log in