एक सहेली मेरी
एक सहेली मेरी
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कभी सीधी कभी सख़्त,
एक सहेली मेरी है।
सिंपल, हम्बल और सशक्त,
एक सहेली मेरी है।।
एग्जाम्पल दे कर है समझाती,
पेटेंट्स ऐक्ट के सेक्शन थ्री
मना नहीं करती कभी,
चाहे बिजी हो या हो फ्री
तरह तरह के काम संभालती,
करती नहीं किसी को निराश।
निष्ठा और वफ़ादारी ने,
बनाया उसे बॉस का ख़ास।।
ललित-प्रिय है, खुद से ज़्यादा,
प्यार ललित को करती है।
ज़िक्र उनका होते ही,
वो लाल शर्म से होती है।।
उससे भी ज़्यादा जीवन में,
चिंता बच्चे की करती है।
लक्ष्य ही है लक्ष्य उसका,
उद्देश्य यही वो रखती है।।
कभी सीधी कभी सख़्त,
एक सहेली मेरी है।।
