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Shailaja Bhattad

Others

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Shailaja Bhattad

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दूरियां

दूरियां

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चाहते तो थे दूरियां घटाना।

इसीलिए परिस्थितियों को चुनते गए अनुरूप।

पर परिणाम निकले सिर्फ प्रतिकूल।

धरती भी कब आसमान से मिली है।

इन दोनों की भी भला कब बनी है।

समझने समझाने का तो अब अस्तित्व ही नहीं।

उत्तर का दक्षिण से मिलना काल्पनिक भी नहीं।।


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